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अजीत डोभाल के खिलाफ साजिश रच रहा था खालिस्तानी आतंकी पन्नू, अमेरिकी अदालत बोली- सब झूठ

पन्नू ने अदालत में दावा किया था कि फरवरी 2020 में, जब अजीत डोभाल वाशिंगटन में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गए थे

हाल ही में अमेरिका की एक कोर्ट ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का वह दावा खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को समन और अन्य कोर्ट दस्तावेज दिए गए थे. अदालत ने इस दावे को नकारते हुए कहा कि डोभाल को समन देने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी.

पन्नू ने अदालत में दावा किया था कि फरवरी 2020 में, जब अजीत डोभाल वाशिंगटन में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गए थे, तब उनके खिलाफ दायर एक सिविल मुकदमे की सुनवाई के लिए समन भेजने की कोशिश की गई थी. पन्नू का कहना था कि उन्होंने डोभाल को समन देने के लिए दो प्रोसेस सर्वर और एक जांचकर्ता नियुक्त किया था.

सुरक्षा की वजह से नहीं हो पाई समन की डिलीवरी

उनके अनुसार सबसे पहले 12 फरवरी को पन्नू के द्वारा नियुक्त एक व्यक्ति ने ब्लेयर हाउस (जहां प्रधानमंत्री मोदी और उनका दल ठहरा था) में समन देने की कोशिश की. हालांकि, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और सीक्रेट सेवा के एजेंटों ने उसे दस्तावेज देने से मना कर दिया. इसके बाद, 13 फरवरी को फिर से एक और कोशिश की गई, लेकिन इस बार भी सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने समन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

कैफे में छोड़ा गया था समन

पन्नू ने दावा किया था कि इसके बाद समन को ब्लेयर हाउस के पास एक कैफे में छोड़ दिया गया, ताकि सीक्रेट सर्विस के एजेंट उसे डोभाल तक पहुंचा दें. हालांकि, अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया. कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया कि अजीत डोभाल को किसी भी तरह का समन नहीं भेजा गया था, जैसा कि पन्नू ने दावा किया था. अदालत ने पन्नू के सभी दावों को नकारते हुए कहा कि समन की प्रक्रिया कानूनी तरीके से पूरी नहीं की गई थी.

Deepak Verma

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