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शिलॉन्ग में राज्य का पहला मैकेनाइज्ड मल्टी-लेवल कार पार्किंग शुरू, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

शहरी मामलों के विभाग (UAD) द्वारा शिलॉन्ग स्मार्ट सिटी लिमिटेड (SSCL) के तहत विकसित इस परियोजना पर करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत आई है।

शिलॉन्ग: बढ़ते यातायात दबाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने विवेकानंद रोड स्थित अतिरिक्त सचिवालय के पास राज्य की पहली मैकेनाइज्ड मल्टी-लेवल कार पार्किंग (MLCP) सुविधा का उद्घाटन किया।

शहरी मामलों के विभाग (UAD) द्वारा शिलॉन्ग स्मार्ट सिटी लिमिटेड (SSCL) के तहत विकसित इस परियोजना पर करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत आई है। आठ मंजिला इस पार्किंग भवन में 58 कारों की क्षमता है और इसमें ऑटोमेटेड रिट्रीवल सिस्टम लगाया गया है, जिससे कम जगह में अधिक गाड़ियां खड़ी की जा सकेंगी और पार्किंग प्रक्रिया तेज होगी।

इस एमएलसीपी की शुरुआत राज्य के शहरी क्षेत्रों में यातायात जाम की जड़ समस्याओं—तेजी से हो रहा शहरीकरण, सड़क किनारे अनियंत्रित पार्किंग और अपर्याप्त पार्किंग ढांचे—से निपटने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है।

दीर्घकालीन योजना के तहत शहरी मामलों का विभाग शिलॉन्ग में ऐसे 10 और एमएलसीपी विकसित कर रहा है। इनसे शहर की पार्किंग क्षमता में कुल 1,371 इक्विवेलेंट कार स्पेस (ECS) का इजाफा होगा। सरकार ने आम जनता से भी संगठित और स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था अपनाने की अपील की है, ताकि यातायात की समस्या को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके।

पार्किंग ढांचे के अलावा सरकार कई पूरक कदम भी उठा रही है, जिनमें शहरी क्षेत्रों के लिए पार्किंग नीति लागू करना, सड़क पर पार्किंग के लिए सख्त नियम, रेहड़ी-पटरी वालों को निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थानांतरित करना और साझा स्कूल परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देना शामिल है।

रेहड़ी-पटरी वालों के स्थायी पुनर्वास के लिए विभाग ने 1,400 विक्रेताओं का सर्वे किया है। किंदाइलाड और सिविल अस्पताल क्षेत्रों में 436 पात्र विक्रेताओं को वेंडर प्रमाणपत्र (CoV) जारी किए गए हैं, उन्हें स्टॉल आवंटित किए गए हैं और प्रत्येक को 20,000 रुपये की स्थानांतरण सहायता दी गई है।

सड़क पर पार्किंग नियंत्रण व्यवस्था फिलहाल शिलॉन्ग के 30 स्थानों पर लागू है, जहां 44,000 से अधिक वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा बनी है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं और शहरी निकायों व समुदाय को 16 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इस योजना को 30 और स्थानों तक बढ़ाने की तैयारी है, जिससे शहर की सड़कों पर 950 से अधिक अतिरिक्त पार्किंग स्पेस जुड़ेंगे।

इसके अलावा, ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग के लिए ग्रांट-इन-एड योजना भी शुरू की गई है, जिसके तहत ग्रेटर शिलॉन्ग प्लानिंग एरिया (GSPA) में जमीन मालिकों को पार्किंग सुविधा बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना में सतही और स्टैक्ड पार्किंग के लिए प्रति ECS 1 लाख रुपये और ऑटोमेटेड पार्किंग सिस्टम के लिए प्रति ECS 5 लाख रुपये तक की मदद का प्रावधान है।

Deepak Verma

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