मेघालय

बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ पर मेघालय इंडिजिनस विमेंस काउंसिल ने जताई चिंता


मेघालय इंडिजिनस विमेंस काउंसिल (MIWC) ने भारत में बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। परिषद ने आशंका व्यक्त की है कि कुछ स्थानीय लोग बाहरी लोगों को सीमा सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार करने में मदद कर रहे हैं।

एक बयान में MIWC की अध्यक्ष बाइथीग्रेस डखार ने 21 जून को सामने आई एक घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। इस मामले में एवरजॉय सियांगशाई, डेविड डखार और अर्पन सियांगशाई, जो लादरिमबाई “बी” के निवासी बताए गए हैं, पर अवैध आवाजाही में मदद करने के आरोप लगे थे।

डखार ने कहा,
“यह बेहद चौंकाने वाला है कि सीमा क्षेत्रों में बीएसएफ की तैनाती के बावजूद बांग्लादेशी नागरिकों को भारत लाया जा रहा है। इससे निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर होती हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां स्थानीय समुदायों की सुरक्षा, संपत्ति और आजीविका के लिए खतरा हैं। इससे चोरी, उत्पीड़न और घरों, खेतों तथा दुकानों के शोषण जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

MIWC अध्यक्ष ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए लादरिमबाई, सू किलो, इयू सीमेंट (सुतंगा) और सीमेंट फैक्ट्रियों में निरीक्षण कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में इन क्षेत्रों में प्रवासी आबादी में तेजी से वृद्धि देखी गई है।

डखार ने जोर देकर कहा कि अवैध घुसपैठ केवल स्थानीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की संस्कृति, भूमि अधिकार और पहचान के लिए भी गंभीर खतरा है।

अर्पन सियांगशाई के संबंध में स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में उनका नाम जरूर आया है, लेकिन वे लादरिमबाई दतसिमपेन के निवासी हैं और बाहरी व्यक्ति नहीं हैं।

मेघालय इंडिजिनस विमेंस काउंसिल ने प्रशासन से सीमा पर निगरानी मजबूत करने, सख्त कदम उठाने और आगे किसी भी अवैध घुसपैठ को रोकने के साथ-साथ राज्य के आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

Deepak Verma

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