न्यायिक वेवस्था

केंद्र सरकार की नई चेतावनी: मीडिया से संवेदनशील जानकारी साझा करने पर सख्त कार्रवाई

केंद्र सरकार ने सरकारी अधिकारियों को मीडिया के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने पर सख्त चेतावनी दी है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक गोपनीय नोट में कहा गया है कि ऐसे मामलों में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह कदम हाल के समय में संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने की घटनाओं में वृद्धि के मद्देनजर उठाया गया है। नोट में अनधिकृत मीडिया संपर्क पर उचित कार्रवाई की बात कही गई है, और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पत्रकारों के प्रश्नों को प्रेस सूचना ब्यूरो को भेजें। जानें इस नई नीति के पीछे की पूरी कहानी।

केंद्र सरकार ने सरकारी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि वे मीडिया के साथ किसी भी ‘वर्गीकृत/संवेदनशील’ जानकारी का आदान-प्रदान करते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA) के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

 

 

गृह मंत्रालय का गोपनीय नोट

 

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने हाल ही में सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को एक गोपनीय नोट जारी किया है, जिसमें इस संबंध में सख्त निर्देश दिए गए हैं। यह कदम हाल के समय में संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने की घटनाओं में वृद्धि के चलते उठाया गया है।

 

 

28 साल पुराने परिपत्र का अद्यतन

 

यह नोट पिछले महीने जारी किया गया था और यह दिसंबर 1998 में जारी एक पुराने परिपत्र का अद्यतन रूप है। इस बार इसमें एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिसमें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी जोड़ी गई है।

 

 

 

सूत्रों ने बताया कि परिपत्र में ‘अनधिकृत या अवांछित तत्वों द्वारा संवेदनशील सूचनाओं के रिसाव की घटनाओं में अचानक वृद्धि’ का उल्लेख किया गया है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो रहा है।

 

 

अनधिकृत मीडिया संपर्क पर कार्रवाई

 

नोट में ‘मीडिया के साथ किसी भी अनधिकृत संचार’ को निशाना बनाते हुए कहा गया है कि ऐसे मामलों में ‘उचित कार्रवाई’ की जाएगी। हालांकि, यह प्रावधान अधिकृत प्रवक्ताओं पर लागू नहीं होगा।

 

 

 

नोट में यह भी कहा गया है कि ‘सरकारी कर्मचारियों का यह कर्तव्य है कि वे अपने आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान प्राप्त होने वाली सूचनाओं और दस्तावेजों की सुरक्षा करें।’

 

 

केंद्रीय सिविल सेवा नियमों का संदर्भ

 

सूत्रों के अनुसार, परिपत्र में यह भी दोहराया गया है कि ‘यह दोहराया जाता है कि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा इस प्रकार की लापरवाही केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियमों के नियम 11 का उल्लंघन है।’

 

 

 

नियम 11 के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना अधिकृत अनुमति के किसी भी सरकारी दस्तावेज या सूचना को साझा नहीं कर सकता।

 

 

मीडिया प्रश्नों के लिए नई प्रक्रिया

 

नोट में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पत्रकारों के प्रश्नों को प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) को भेजा जाए या उत्तर देने से पहले संबंधित सचिव की अनुमति ली जाए।

 

 

 

एक अन्य सूत्र के अनुसार, नोट में मीडिया की ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ को स्वीकार किया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि ‘अनधिकृत सरकारी कर्मचारियों द्वारा सूचना के त्वरित और असत्यापित प्रसार को रोकना आवश्यक है।’

 

 

1998 के परिपत्र से भिन्न दृष्टिकोण

 

सरकारी हलकों में इस नोट को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया गया है, क्योंकि दिसंबर 1998 में जारी मूल परिपत्र केवल सलाहात्मक था और उसमें OSA का उल्लेख नहीं था।

 

 

 

हालांकि, दोनों परिपत्रों में एक समानता यह है कि दोनों में हालिया लीक का संदर्भ दिया गया है।

 

 

संस्मरण विवाद की पृष्ठभूमि

 

हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि अधिकारियों को पद छोड़ने के बाद 20 वर्ष तक किताबें या संस्मरण प्रकाशित करने की अनुमति न दी जाए। यह चर्चा पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ से जुड़े विवाद के बाद सामने आई।

 

 

 

अगस्त 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध के दौरान किए गए उनके दावों ने संसद के बजट सत्र के पहले चरण में राजनीतिक हलचल पैदा की थी।

 

Deepak Verma

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