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मेघालय हाईकोर्ट ने आग से प्रभावित कैंटोनमेंट निवासियों को अस्थायी आश्रय बनाने की अनुमति दी

16 जनवरी 2026 को लगी आग में पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई थीं।

शिलांग, 4 फरवरी:

मेघालय उच्च न्यायालय ने मंगलवार को शिलांग के 29 कैंटोनमेंट क्षेत्र में हाल ही में लगी आग से प्रभावित निवासियों को अस्थायी आश्रय बनाने की अनुमति दी है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जाएगा।

यह निर्देश उस रिट याचिका की सुनवाई के बाद दिया गया, जो उन निवासियों द्वारा दायर की गई थी जिनकी झोपड़ीनुमा संरचनाएं 16 जनवरी 2026 को लगी आग में पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आग लगने के बाद से वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और कड़ाके की ठंड के बावजूद उन्हें अस्थायी आश्रय तक बनाने से रोका जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एस. सिद्दीकी ने अदालत को बताया कि निवासी केवल अस्थायी, मौसमरोधी और हवा से बचाव वाले ढांचे बनाने की अनुमति चाहते हैं, ताकि उन्हें बुनियादी आश्रय मिल सके, और इससे प्रतिवादियों के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

वहीं, कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी. महंता ने अदालत को सूचित किया कि संबंधित भूखंड की लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है और इससे संबंधित मामले वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। इस दलील का समर्थन अन्य निजी प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भी किया गया।

हालांकि, सभी प्रतिवादियों ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि राहत दी जाती है तो वह केवल अस्थायी ढांचों तक सीमित होनी चाहिए और केवल उन्हीं लोगों को दी जाए जो आग से सीधे प्रभावित हुए हैं।

याचिकाकर्ताओं की “दयनीय स्थिति” और मांगी गई सीमित राहत को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने भूमि के कब्जे, किरायेदारी या लीज से जुड़े लंबित कानूनी मामलों को प्रभावित किए बिना कुछ दिशा-निर्देश जारी किए।

न्यायालय ने कैंटोनमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिया कि वह सात दिनों के भीतर स्थल का निरीक्षण और सत्यापन कराएं। यह निरीक्षण कैंटोनमेंट बोर्ड, राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन विभाग और संबंधित निजी प्रतिवादियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा।

निरीक्षण का उद्देश्य केवल 16 जनवरी की आग से प्रभावित निवासियों की पहचान करना होगा। सत्यापन के बाद, केवल उन्हीं लोगों को अस्थायी आश्रय बनाने की अनुमति दी जाएगी। न्यायालय ने साफ तौर पर कहा कि उक्त भूखंड पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण अनुमन्य नहीं होगा।

इन निर्देशों के साथ, उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा कर दिया।

Deepak Verma

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