
शिलांग, 24 जनवरी: मेघालय ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और बेहतर लॉजिस्टिक्स को अपनी बाहरी व्यापार रणनीति की रीढ़ बनाते हुए वर्ष 2032 तक सीमा पार निर्यात को सालाना 100 मिलियन डॉलर तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों में सामने आई है।
‘मेघालय विज़न 2032’ में उल्लिखित रणनीति के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में बुनियादी ढांचे पर आधारित हस्तक्षेपों ने राज्य के सीमा व्यापार परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में सीमा व्यापार का कुल निर्यात मूल्य जहाँ ₹254 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2024 में यह बढ़कर ₹852 करोड़ हो गया है। इस अवधि में कुल व्यापार मूल्य ₹2,400 करोड़ से अधिक पहुँच चुका है। यह वृद्धि मुख्य रूप से भूमि सीमा शुल्क ढांचे में सुधार, सीमा सड़क कनेक्टिविटी और पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ व्यापार सुविधा बढ़ाने के कारण हुई है।
योजना का केंद्र मौजूदा लैंड कस्टम्स स्टेशनों (LCS) को अपग्रेड कर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) में बदलना है, जिनमें स्थिर नेटवर्क कनेक्टिविटी, वेइ-इन-मोशन ब्रिज और आधुनिक भंडारण सुविधाएँ होंगी। फिलहाल राज्य में छह LCS कार्यरत हैं, जिन्होंने पिछले पाँच वर्षों में ₹2,400 करोड़ से अधिक का व्यापार संभाला है, जबकि दावकी ICP एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में उभरा है जो बड़े व्यापारिक वॉल्यूम को संभालने में सक्षम है।
कनेक्टिविटी परियोजनाएँ भी इस रणनीति का अहम स्तंभ हैं। राज्य ने 20 किलोमीटर लंबे धुबरी–फुलबाड़ी पुल और प्रस्तावित 166 किलोमीटर शिलांग–सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर को महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के रूप में चिन्हित किया है। ये परियोजनाएँ परिवहन समय को काफी कम करेंगी और मेघालय को क्षेत्रीय तथा सीमा पार बाजारों से और मज़बूती से जोड़ेंगी। विज़न दस्तावेज़ में कहा गया है कि शिलांग–सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर बेहतर पहुंच, मज़बूत क्षेत्रीय एकीकरण और जीवन गुणवत्ता में सुधार की दिशा में राज्य की निरंतर प्रगति का संकेत है।
सीमा हाट भी स्थानीय व्यापार और आजीविका में बढ़ती भूमिका निभा रहे हैं। मेघालय में फिलहाल पाँच कार्यशील सीमा हाट हैं और 14 नए LCS/ICP सुविधाओं के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है, साथ ही अतिरिक्त सीमा हाट भी विकसित किए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर व्यापार और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाया जा सके।
विज़न दस्तावेज़ में कहा गया है, “सरकार केंद्र के मंत्रालयों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है ताकि ASEAN और अन्य देशों की संवेदनशील व निषिद्ध सूचियों से मेघालय के हित से जुड़े उत्पादों को हटाया जा सके, जिससे निर्यात सुगम होगा और आर्थिक लाभ बढ़ेंगे।” वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के दूसरे चरण में कुल 92 गांवों को शामिल किया गया है।
राज्य की 2028 की रोडमैप के तहत सालाना 50 मिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही BBIN (बांग्लादेश–भूटान–भारत–नेपाल) कॉरिडोर को मज़बूत करने और व्यापार के लिए तैयार वस्तुओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया है। 2032 तक ध्यान व्यापार योग्य वस्तुओं की टोकरी बढ़ाने, बहुआयामी कनेक्टिविटी विकसित करने और निर्यात को 100 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष तक पहुँचाने पर रहेगा।
अधिकारियों का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी पर यह जोर सीमा व्यापार को खंडित व्यवस्था से एकीकृत, कॉरिडोर-आधारित दृष्टिकोण में बदल रहा है, जिससे मेघालय बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिए एक संभावित पूर्वी प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है।



