मेघालय

शिलांग में केवल गैर-खासी इलाकों में ही नए व्यापार लाइसेंस जारी हों

शिलांग, 24 जनवरी: खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (KHADC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य विंस्टन टोनी लिंगडोह ने शुक्रवार को कहा कि परिषद ने विशेष रूप से शिलांग शहर में एक सख्त व्यापार लाइसेंस नीति अपनाई है, जिसके तहत अब नए लाइसेंस केवल उन्हीं इलाकों में जारी किए जाएंगे जहाँ कोई खासी निवासी नहीं हैं।

थेम मावबह क्षेत्र में गैर-जनजातियों को इलेक्ट्रॉनिक दुकानें चलाने के लिए लाइसेंस दिए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए लिंगडोह ने कहा कि वहाँ केवल एक ही नया लाइसेंस जारी किया गया है और उस इलाके में अब कोई भी खासी निवासी नहीं रहता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थानीय स्वदेशी लोग थेम मावबह में दुकान खोलने के लिए आगे आते हैं, तो परिषद तुरंत उस गैर-जनजातीय व्यापारी का लाइसेंस रद्द कर देगी जो वर्तमान में वहाँ इलेक्ट्रॉनिक दुकान चला रहा है।

लिंगडोह ने बताया कि संबंधित गैर-जनजातीय व्यापारी वहीं पैदा हुआ और पला-बढ़ा है तथा दशकों से वहीं रह रहा है। सभी दस्तावेजों की जांच और स्थानीय दोरबार श्नोंग (ग्राम परिषद) से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेने के बाद ही लाइसेंस जारी किया गया।

उन्होंने कहा, “हम बिना पूरी जांच-पड़ताल के कोई भी व्यापार लाइसेंस जारी नहीं करते। हमारे कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि आवेदन मिलने के बाद वे स्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन करें, तभी लाइसेंस दिया जाए।”

लिंगडोह ने कहा कि अन्य इलाकों में भी परिषद व्यापार लाइसेंस जारी करने को लेकर बेहद सतर्क है। “बिना पूरी जांच और ट्रेड डिपार्टमेंट के कर्मचारियों द्वारा व्यापार की प्रकृति और उसकी व्यवहारिकता का आकलन किए बिना कोई लाइसेंस नहीं दिया जाता,” उन्होंने कहा। उन्होंने जोर दिया कि यदि कोई स्वदेशी स्थानीय व्यक्ति किसी व्यापार को करने में सक्षम है तो प्राथमिकता हमेशा उसे ही दी जाती है।

उन्होंने बताया, “पहले हम स्थानीय लोगों को ऐसे व्यवसाय करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अगर फिर भी कोई आगे नहीं आता, तभी गैर-जनजातियों को लाइसेंस देने पर विचार किया जाता है।”

व्यापार लाइसेंस के नवीनीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि परिषद को अभी सटीक आंकड़े नहीं मिले हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस केवल उन मामलों में दिए जाते हैं जहाँ कंपनियाँ टेंडर के तहत काम करती हैं या ऐसे विशेष कार्य होते हैं जिन्हें स्थानीय लोग नहीं कर सकते।

“ऐसे लाइसेंस सीमित संख्या में होते हैं। कुछ एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ विशेष टेंडरों से संबंधित होते हैं जहाँ स्थानीय लोग काम करने की स्थिति में नहीं होते,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे बताया कि परिषद खानापारा जैसे इलाकों में भी व्यापार लाइसेंस जारी करती है ताकि यह दर्शाया जा सके कि वह क्षेत्र मेघालय के अंतर्गत आता है।

Deepak Verma

Related Articles

Back to top button