मेघालय

गारोलैंड स्टेट मूवमेंट कमेटी ने गैर-जनजातियों पर कड़े प्रतिबंधों वाले प्रस्ताव पारित किए

गारोलैंड स्टेट मूवमेंट कमेटी (GSMC) ने गारो हिल्स क्षेत्र में गैर-जनजातियों पर व्यापक और विवादास्पद प्रतिबंध लगाने से जुड़े कई अहम प्रस्ताव पारित किए हैं। ये प्रस्ताव 10 जनवरी को तुरा में आयोजित केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से अपनाए गए।

बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी अध्यक्ष बलकारिन च. मराक ने की, जिन्होंने जनजातीय अधिकारों और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। सह-अध्यक्ष जकरक ए. संगमा ने स्वागत भाषण दिया, जबकि रायन च. मराक ने तुरा के बदलते स्वरूप पर अपने विचार प्रस्तुत किए। धन्यवाद ज्ञापन महासचिव टोनी तोजरंग बी. मराक ने दिया।

बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में GSMC ने बताया कि सभी प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के बाद उन्हें सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। प्रमुख प्रस्तावों में तुरा में गैर-जनजातियों की व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध और गारो हिल्स क्षेत्र में गैर-जनजातियों के प्रवेश को सीमित करने की मांग शामिल है।

कमेटी ने चुनावी फोटो पहचान पत्र (EPIC) और आधार कार्ड जारी करने को लेकर आयु-आधारित प्रतिबंधों का भी प्रस्ताव पारित किया। इसके तहत यह तय किया गया कि ए•चिक ए•सॉंग और छठी अनुसूची क्षेत्रों के निवासी केवल 18 से 20 वर्ष की आयु के बीच ही EPIC कार्ड प्राप्त कर सकेंगे, जबकि गैर-जनजातियों के लिए ऐसे प्रावधान केवल दो वर्षों के लिए वैध होंगे। एक अन्य प्रस्ताव में गैर-जनजातियों को उनके बच्चों के लिए केवल 3 से 8 वर्ष की आयु के बीच आधार कार्ड जारी करने की अनुमति देने की बात कही गई।

शासन से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाते हुए GSMC ने गारो हिल्स में नगरपालिकाओं को समाप्त करने की अपनी मांग दोहराई। कमेटी ने संविधान के अनुच्छेद 243(ZC) का हवाला देते हुए कहा कि छठी अनुसूची क्षेत्रों को नगरपालिका शासन से छूट प्राप्त है। साथ ही, गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (GHADC) द्वारा मकान निर्माण पर लगाए जा रहे एक प्रतिशत शुल्क पर गंभीर चिंता जताई गई और इसे जनजातीय गारो लोगों के लिए तुरंत वापस लेने की मांग की गई।

कमेटी ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि गैर-जनजातियों को GHADC के तहत काम करने की अनुमति न दी जाए और वे आगामी GHADC चुनावों में न तो मतदान करें और न ही चुनाव लड़ें। इसके अलावा, गारो हिल्स में सभी सरकारी और विकास कार्यों के ठेके केवल जनजातीय गारो लोगों को देने की मांग की गई। अधिकारियों से गैर-जनजातियों के मौजूदा ठेका पंजीकरण रद्द करने और राज्य आरक्षण नीति के अनुरूप गारो लोगों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया।

अन्य प्रस्तावों में बे नामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 2016 के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की मांग और न्यू तुरा डेवलपमेंट फोरम द्वारा उठाई गई उस चिंता का उल्लेख शामिल है, जिसमें तुरा में व्यापार कर रहे गैर-जनजातियों के नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट रद्द किए जाने का मुद्दा उठाया गया था।

इस बैठक में रोंगखोन सोंगिताल नोकमा, तुरा आकोंग्रे नोकमा, न्यू तुरा डेवलपमेंट फोरम के नेता, ऑल इंडिया गारो यूनियन की तुरा इकाई, ए•चिक स्टेट पीपल्स फ्रंट, ऑल ए•चिक यूथ वेलफेयर सोसाइटी, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ GSMC के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

इन प्रस्तावों को लेकर राज्य में राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है, विशेष रूप से छठी अनुसूची क्षेत्रों में इनके संवैधानिक औचित्य और विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर।

Deepak Verma

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