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भारत के 3900 सैनिकों ने शहादत दी थी, अब उसी बांग्लादेश की धरती अल्पसंख्यकों के खून से लाल, गुस्से में पवन कल्याण

बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने तीखा हमला बोला है। पवन कल्याण ने दीपू चंद्र दास को श्रद्वांजलि देते हुए लिखा है कि भारत के 3900 सैनिकों ने शहादत दी थी, अब उसी बांग्लादेश की धरती अल्पसंख्यकों के खून से लाल हो रही है। गौतलब हो कि गुरुवार की रात कट्‌टरपंथियों की भीड़ ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को पीट-पीटकर मार डाला था। कई रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया है कि कट्‌टरपंथियों ने ईशनिंदा के आरोप में हिंदू युवक को बेरहमी से मारा। इतना ही नहीं भीड़ ने इस घिनौने कृत्य के वीडियो भी बनाए। पवन कल्याण से पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से कड़ा संज्ञान लेने का आग्रह किया था।

तस्लीमा के बाद पवन भी गुस्से में

बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या पर प्रख्यात लेखिका तस्लीम नसरीन ने पोस्ट की है। उन्होंने लिखा है कि दीपू चंद्र दास मैमनसिंह के भालुका की एक फैक्ट्री में काम करते थे। एक दिन एक मुस्लिम सहकर्मी किसी छोटी सी बात पर उन्हें सजा देना चाहता था, इसलिए उसने भीड़ के बीच ऐलान कर दिया कि दीपू ने पैगंबर के बारे में अपमानजक बातें कही हैं। बस इतना ही काफी था। इस घटना पर आंध्र के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने लिखा है कि दीपू चंद्र दास की आत्मा के लिए प्रार्थना। इतिहास बलिदान को याद रखता है। लेकिन आज जिस जमीन को कभी भारतीय खून से आज़ाद कराया गया था, वह मासूम अल्पसंख्यकों के खून से रंगी जा रही है।

यह टारगेटेट अटैक है: कल्याण

1971 में भारतीय सेना के बहादुरी सैनिकों ने बहादुर सैनिकों ने सिर्फ़ युद्ध नहीं लड़ा; उन्होंने लाखों लोगों की पहचान और गरिमा के लिए लड़ाई लड़ी, जिसे अब बांग्लादेश कहा जाता है। बांग्लादेश के जन्म को सुनिश्चित करने के लिए लगभग 3,900 भारतीय सैनिकों ने अपनी जान कुर्बान कर दी और 10,000 से ज़्यादा घायल हुए। हमने अपनी जान दी ताकि दूसरे शांति से रह सकें। पवन कल्याण ने आगे लिखा है कि लेकिन आज शांति सिर्फ एक शब्द है। उत्पीड़न सच्चाई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, अगस्त 2024 और जुलाई 2025 के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 2,442 घटनाओं को दर्ज किया गया। 150 से ज्यादा मंदिरों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें अपवित्र किया गया। ये सिर्फ अशांति या बेतरतीब अराजकता के काम नहीं हैं। यह एक समुदाय के विश्वास और उसके अस्तित्व के अधिकार पर जानबूझकर किया गया, लक्षित हमला है।

हम चुप नहीं रह सकते हैं…

पवन कल्याण ने आगे लिखा है कि मैं बांग्लादेश के लीडरशिप से अपील करता हूं कि वे सिर्फ निंदा करने से आगे बढ़कर शांति बहाल करें। आपको हर हिंदू, बौद्ध और ईसाई नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। मैमनसिंह की भयानक घटना के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि यह साबित हो सके कि कोई भी भीड़ कानून से ऊपर नहीं है। मैं दुनिया के नेताओं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र से भी आग्रह करता हूं कि वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर ध्यान दें। चुप्प रहना मानवाधिकारों के साथ धोखा है। हमारे 1971 के शहीदों का खून शांति की ज़मीन के लिए बहा था, न कि उत्पीड़न की ज़मीन के लिए। हम चुप नहीं रह सकते, और न ही रहेंगे।

Deepak Verma

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